2011, ऑक्टोबर

फिर एक बार सुदामा …!

फिर एक बार सुदामा अपने चावल लेकर आ पहुंचा द्वारका .. उसका नगर देखकर दांग रहना लोगोंका उसपर हँसना  बिलकुल वैसाही जैसे पहले हुआ था .. […]